सपना – 16


आज का सपना:
एक दोस्त से पूछ रहा हूँ; “अच्छा एक बाताओ यह जो मुर्दा शांति से भरे हुए हो..” अभी बात पूरी भी नहीं होती और दोस्त पूछता है, “यह मुर्दा शांति क्या होती है भाई ?” …
“मतलब यह ही की न खीज है, न तड़प, सब सह लेते हो, रोज दफ्तर चले आते हो – शाम घर चले जाते हो; कोई सपना नहीं देखते; कोई सपना आता ही नहीं तुमको; मैंने कभी नहीं देखा तुम्हे रात का तारा दिन में ढूँढ़ते हुए – तुम्हे कभी नहीं लगता की इस मुर्दा शांति के इलाज के लिए तुम्हे कुछ करना चाहिए??”

दोस्त जोर जोर से हँसने लगा – बोला – दोस्त अभी सर्दियाँ चल रही हैं न – सर्दियों में सब जम जाता है… मेरी आँख के जम जाने के कारण मुझे दिखाई नहीं देता – तुम भी एक काम करो थोड़ी गर्मी कम करो अपनी – तुम्हे भी दिखना बंद हो जायेगा – और फिर तुम भी शांत हो जाओगे

बहुत सारे दोस्त हँसने लगते हैं…..

सपना – 25


आज का सपना:
मैं स्कूल की रीयूनियन मे खड़ा हूँ, निक्कर मे, खाकी रंग की निक्कर! पीछे दुष्यंत कुमार की कविता कोई गा रहा है; “हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए”
तभी एक दोस्त मसान फिल्म का गाना गता है , “तू रेल सी गुजरती है मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ ”
फिर कहता है, यह भी दुष्यंत की रचना है; तुम्हें क्या प्रेम से बदहजमी है

सपना – 24


आज का सपना :
सीन तो यह था की मैं किसी यूनिवर्सिटी के आगे खड़ा था और पोलिसवाल बोल रहा था
जबान खोल और दिखा जबान पर क्या लिखा हुआ है जो तू उगल सकता है .. देखूँ तो सही कहीँ कुछ देहद्रोह जैसा तो नहीं रखा है..
मैं जुबान खोलता हूँ तो पुलिसवाला कहता है
जबान तो २००० के गुलाबी नोट जैसी है तेरी .. बता नोटबंदी पर क्या विचार है तेरा
मैं जोर से कहता हूँ करप्शन से आजादी
और पुलिसवाला मुझे पकड़ लेता है .. क्या बोला बे आज़ादी – देहद्रोही

सपना -23


आज का सपना :
सपने मे सुबह होती है !!! सुबह उठकर बाहर निकलता हूँ तो देखता हूँ की आकाश तिरंगे रंग का हो गया है; देशप्रेम मे आकाश हिलोरें भर रहा है; यह बताने अंदर आया तो पता चला टीवी वाले भी एहि दिखा रहे हैं; हर जगह से एहि खबर की आकाश अब तिरंगे मे रंगा है : यही अब आकाश का रंग होगा पूरे भारत मे होगा : धूप छाँव बरखा कुछ भी हो आसमान तिरंग रहेगा .. देशप्रेम परिभाषित हो गया है यह खबर मैं शर्मा जी को देता हूँ तो वो अपनी पत्नी से कहते हैं – चलो बढ़िया हुआ, सुनो बिटिया को कहो अब कॉलेज चली जय; अब खतरा टल गया है !!!!

सपना – 22


आज का सपना :
देखता हूँ माननीय रिजिजू मणिपुर के रिमोट एरिया में बैताल पकड़ने गए हुए हैं .. बैताल है की बार बार उनसे एक ही सवाल पूछता है; बता किसने उस लड़की का दिमाग पोल्लूट किया ?
जैसे ही रिजिजू बोले बैताल उड़ा और फिर मणिपुर चला गया..

सपना -21


आज का सपना :
देखता हूँ किसी देश के हुकुमरान का ख़ास मेहमान हूँ; शाम होते ही मेजबान मुझे कहता है आओ अब तुम्हें मुर्गों की लड़ाई दिखाता हूँ.. मैदान मे दो मुर्गे हैं, दोनों के पाओं मे ब्लेड बाँध दिए गए हैं; खूब लड़ते हैं.. लड़ते ही जाते हैं-ब्लेड से दोनों एक दुसरे को जख्मी कर रहे हैं
मैं कहता हूँ इनके हत्यारे आप हैं की ब्लेड आपने बांधे हैं
हुकुमरान कहता है; तुम्हारा दिमाग किसी ने पोल्लूट कर दिया है

सपना – 15


यह सपने बांटने वाली परी भी मेरे खिलाफ हो गयी है .. कल का सपना लो .. अर्श (आसमान) के पिताजी सपने मे आये और जोर से मेरी गुद्दी पर लगाते हुऐ बोले, मेरे द्वारा भेजे युगपुरुष पर सवाल उठाता है, जानता नहीं यह अब पाप है ?