प्रतिनिधि कहानियां : मृदुला गर्ग


सिर्फ एक कहानी उठाते हैं.

हरी बिंदी … एक विवाहिता है, अपने जीवन और उसके टाइम टेबल से धीरे-धीरे उक्ता सी गयी है, घर परिवार, पति और रोजाना वही सिलसिलेवार सी जिंदगी.

कहानी एक सुबह से शुरू होती है जब उसकी आँख खुलती है और उसे ध्यान आता है की उसका पति आज अपने किसी काम के सिलसिले में दिल्ली गया हुआ है … उसको एकाएक महसूस होता है कि आज टाइम टेबल कि कोई पाबंदी नहीं है … उसके बाद से पुरे दिन कि कहानी ही है हरी बिंदी …

इस कहानी कि बाकि परतों को मैं खोलना नहीं चाहता, वो मैं पाठक के लिए छोड़ देना चाहता हूँ. मैंने आजतक एक भी ऐसा पाठक नहीं देखा जो इस कहानी को एक नए सन्दर्भ के साथ जोड़कर मुझे यह न कहता हो कि वो इस हरी बिंदी वाली से मिल चुका है, उसे जानता है .

कहानी पढ़कर आपको यह लगेगा की आपने यह कहानी अपने आस पास घटित होते कई बार देखि है. पढ़िए और खूब आनंद लीजिये.

लेखिका के बारे में में कुछ ज्यादा नहीं जानता. हाल फिलहाल में मृदुला गर्ग, “अवार्ड वापसी” विवाद के केंद्र में थीं. शायद उनहोंने अपना साहित्य अकादमी अवार्ड वापस लौटा दिया था. नारी जीवन के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्वरुप को सहजता और सरलता से प्रस्तुत करने की क्षमता रखने वाली महिला लेखिकाओं में मृदुला गर्ग का स्थान सर्वोपरी माना जाता है.

किताब सिर्फ ७५/- की है और उसपर भी १०-१५% की छूट मिलती है … किताब की हर कहानी का मुख्य पात्र आपको देखा हुआ सा लगेगा, अपने ही परिवार का कोई याद आ जायेगा. हर कहानी की सेटिंग (स्थापना) वर्तमान समय में प्रासंगिक लगेगी, हर काहनी का प्लाट शानदार है, पात्रों का अपने आप से संघर्ष और कहानी के अंत में हर संधर्ष का समाधान पाठक को पसंद आएगा ही आएगा