अफवाह


अफवाह की तो उम्र होती है
सो उसकी उम्र के बाद
जब दीवारों पर खिड़कियाँ निकल आएंगी
और प्रकाश तैरने लगेगा हर कोने से कोने तक
तब क्या करोगे ?
क्या तुम फिर एक अफवाह का सहारा लोगे ?

चलो उसकी छोड़ो
तुम कब तक ठगे जाते रहोगे?
क्या तुम्हे अफवाह और सच में फ़र्क़ करना नहीं आता?
या फिर फिर ठगा जाना अच्छा लगता है।