महानगर का जीवन


बहुत सारे सच सुन लेने के बाद
मन में भरा शोक
झूठ के एक डोज़ से हर्षित हो उठता है
सच थोड़ा कम जमा झूठ थोड़ा ज्यादा बराबर
महानगर का जीवन