लघु कथा १४ :


लघु कथा १४ :
युगपुरुष (सालभर पहले एक रैली में) :पेट्रोल का दाम कम हुए की नही हुए?
आम जनता : हुए
युगपुरुष (रैली में) :डिजल का दाम कम हुए की नही हुए?
आम जनता : हुए
युगपुरुष (रैली में) :आप के जेब में थोड़ा बहुत पैसा आया की नही आया
आम जनता : आया
युगपुरुष (रैली में) :आप को नसीब वाला चाहिए की नही चाहिए
आम जनता : चाहिए
पहला, दूसरा और तीसरा युगपुरुष का भाषण सुन रहे थे
पहला : यह तो पुराना वाला है न
दूसरा : हम्म .. लगता तो पुराना ही है
तीसरा : अबे नहीं यह आने वाला है … क्योंकि अच्छे दिन अभी आने वाले हैं
और तीनों खूब हसने लगे

लघु कथा 13:


लघु कथा 13:
पहला : बापू का पूरा नाम क्या था ?
दूसरा : बापू का पूरा नाम आसाराम बापू था
तीसरा : अबे क्या बोलता है
पहला (तीसरे को नज़रअंदाज़ कर ) : बापू जेल क्यों गए ?
दूसरा : बापू बलात्कार के आरोप में जेल गए
तीसरा : अबे क्या बोलता है ?
पहला और दूसरा हंसने लगते हैं, तीसरा : बापू का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, वह देश की स्वतन्त्रा के लिए जेल गए
और फिर वो तीनो कनाट प्लेस के बीचों बीच लगे झंडे को देखते हुए कहते हैं “तो मिल गयी आजादी ?”

लघु कथा १२


लघु कथा १२

पहला : (-) + (-) = क्या होता है ?
दूसरा : सरकार किसकी है प्रदेश में?
तीसरा : उससे क्या फरक पड़ता है भाई
पहला जोर जोर से हंसने लगता है; दूसरा उसका साथ देता है; फिर पहला कहता है
पहला : सरकार के बदलते ही इतिहास बदलने की बात नहीं सुनी ?
तीसरा : भाई लेकिन यह तो गणित का सिद्धांत है; इसमें सरकार क्या करेगी ?
दूसरा : खबर नहीं पढ़ी क्या ? नयी सरकार का मंत्री कहता है गणित में (-) + (-) = (+) और केमिस्ट्री में (-) + (-) = (-) होता है
पहला : शायद उल्टा बोला था भाई
उल्टा पुल्टा उल्टा पुल्टा कहते सभी हसने लगते हैं

लघु कथा 11


 

पहला : उम्र क्या है तुम्हारी बाबाजी ?
दूसरा : साहब ५० – ५२ होगी; लेकिन खेती कर लेता हूँ साहब – शरीर पर मत जाईये साहब, हड्डियां मजबूत हैं
पहला : (तीसरे से ) तेरी क्या होगी भाई ?
तीसरा : जोर जोर से हसने लगता है
फिर सभी पहला, तीसरा, चौथा, पांचवा हसने लगते हैं

लघु कथा १०


लघु कथा १०


पहला बोला “मेरे पास ४ गुल्लक थीं, मैंने चारों तुड़वा दी और बैंक में जमा करवा दीं – ठीक किया न ?”

दूसरा बोला “मेरी बीवी के पास से काफी धन निकला – उसने सारा बैंक मे जमा करवा दिया – ठीक किया न ?”

तीसरा लोकल सेठ था – नोटेबंदी के बाद कंगला हो गया था, बोला ” बहुत बढ़िया किया भाई, देखो वो और बात है की साल भर में ही दो हज़ार के उस जादुई नोट, जिसमें जी टीवी और आजतक आदि ने gps chip लगवाई थी, की खेपें बांग्लादेश से आ रही हैं – लेकिन तुमने बहुत अच्छा किया”

तीनो खूब जी भरके हँसे और उसके बाद कनाट प्लेस के गोल चक्कर के बीचो बीच लगे झंडे पर सलाम ठोकते हुए बोले – “मेरा देश बदल रहा हैं आगे बढ़ रहा है”

लघु कथा ९



लघु कथा ९

पहला बोला, “मैं उर्दू सीख रहा हूँ ”

दूसरे ने प्रश्न किया ” क्यों बे, आजकल तो सब हिंदी, संस्कृत सीख रहे हैं, तू क्यों उल्टा चल रहा है?”

तीसरा शायद समझ गया इसलिए बोला, “सही कर रहा है, दांयें से बांये मे फायदा है”

दूसरा बोला “है?”

पहले ने जवाब दिया, “देख यह एकबार देख”

पहले ने पुछा, “अबे यह तो हिंदी में है, इसमें उर्दू कहाँ हैं ?”

तीसरा बोला, “अखबार में पेट्रोल के दाम के बारे में क्या लिखा हैं ?”

दूसरा बोला, ” 57 से 75 हुए ”

पहले बोला “अब उर्दू में पढ़ – दांयें से बांये”

दूसरा बोला, “75 से 57 हुए ”

तीसरा बोला, “देखा कमाल, विकास दिखने लगा न, इसीलिए पहला आजकल सब उर्दू में पढता है – दांयें से बांये”

पहला बोला, “पता हैं GDP उर्दू में क्या है?”

दूसरा बोलता है ” हिंदी में 8.5 से 5.8 और उर्दू में 5.8 से 8.5 ”

तीनो जोर जोर से हसने लगते है

सपना ४८


सपना ४८


रात का दूसरा कोना आ गया है और अभी तक सपने का नामोनिशान नहीं; मैंने खुद को पुछा, “आज सपना क्यों नहीं देख रहा”… इससे पहले की वो जवाब देता एक नयी मर्सेडीज़ बेंज जी ६३ गाडी सपने मे आकर खड़ी हो गयी; चालक की लम्बी दाढ़ी थी, कार का रंग एकदम हरा – धुआं भी हरा छोड़ रही है .. तभी ड्राइवर सीट से आवाज़ आती हैं, “अरे भाई श्री श्री चल बैठ यार, निकलना है – भारत की नदियों को बचाना है”
“लेकिन इतनी देर कहाँ लग गयी तुझे?” श्री श्री पूछते हैं
“यार गाड़ी रंगवा रहा था – हरे रंग की गाडी बढ़िया रहेगी – सही मैसेज जायेगा !! – और धुआं भी रंगीन हैं इसका – खालिस हरा ”
“बढ़िया किया जग्गी – अब लगती है न यह जग्गी “the satguru ” दी गड्डी” श्री श्री बोले और गाड़ी में बैठ गए .
४ * ४ गाड़ी यमुन्ना के घाट पर कहाँ फसने वाली थी … फररर से निकल पड़ी

लघु कथा ८


लघु कथा ८:


“और हेलीकॉप्टर क्यों खरीद रहे हैं सरकार?” पहले ने अखबार पढ़ते हुए पुछा
“देश में बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्र बढ़ते जा रहे हैं न” दुसरे ने उत्तर दिया
तीसरा जोर जोर से हंसने लगा … शायद उसको उत्तर में छिपा व्यंग्य समझ आ गया…
“हँसता क्यों हैं भाई?” पहले ने पुछा
दूसरा बोला, “अबे जब बाढ़ आएगी तो वेस्टलैंड के हेलीकॉप्टर में बैठकर सरकार टूर पर भी तो जाएगी”
तीसरा बोला “और जितनी बाढ़ उतने टूर … उतने हेलीकॉप्टर”
पहले ने कहा “नहीं यार, श्री श्री और जग्गी वासुदेव लगे हैं नदी और वन बचने में”
तीसरा फिर से जोर जोर से हंसने लगा, “भाई मेधा पाटकर से ज्यादा तो नहीं लगे होंगे”
दूसरा और जोर से हँसते हुए बोला, “भारत की माध्यम वर्ग जनता से अगर कुछ भी करवाना है तो एक साधू रहसयवादी तांत्रिक की सेवाओं की जरूरत पड़ती है भाई – मेधा पाटकर की नहीं ”
फिर तीनो हसने लगे

सपना ४७


सपना ४७ :


कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहा हूँ; तभी एक नोटिफिकेशन आता है – “once in a lifetime offer ” … पहले तो लगता है शायद कोई ऑनलाइन कंपनी का नोटिफिकेशन होगा – “एक लो और ३ फ्री टाइप वाला” लेकिन फिर एक नज़र ध्यान से देखता हूँ तो पता चलता है यह तो “जग्गी वासुदेव स्वामी” की कंपनी से आया है – नोटिफिकेशन पर क्लिक करता हूँ तो बहुत से अंग्रेजों की फोटो वाली बैकग्राउंड पर लिखा है – सीखो योगा … “यार स्वामी के भक्त तो पैसे वाले हैं- अँगरेज़ टाइप” खुद से ही बात कर रहा हूँ

फिर एकदम से सीन बदल जाता है … मैं मोहाली में हूँ, बाबा राम रहीम की फोटो सामने के नाले में तैर रही है, चारों तरफ बिखरी हुई हैं और लोग युवराज सिंह के घर पर पत्थर मार रहे हैं – युवराज सिंह? कहाँ से आ गया बीच में? सीन फिर बदल जाता है – टीवी पर खबर चल रही है “भारत फिर हारा – क्रिकेटरों के घर पर पथराव”

“अजब देश है भाई – सर पर बिठाते हैं तो भगवान् बना लेते हैं – अंध भक्ति – और सर से उतारते हैं तो खून के प्यासे हो जाते हैं” अतिरेक ही अतिरेक

सपना ४६ :


सपना ४६ :


गूगल से पूछता हूँ “बाबा को दूसरे आदमियों के अखरोट निकालने का शौक क्यों था” …. गूगल कोई रिजल्ट नहीं देता; शायद उसको भी नहीं पता की यह शौक क्यों रहा होगा बाबा को … लेकिन गूगल हार नहीं मानता – गूगल मुझसे बोलता है, “भाई मुझे तो नहीं पता, अगर तू बोले तो एक बार सिग्मंड फ्रायड से पूछ कर आऊं?”
मैं बोलता हूँ, “टॉय कर ले लेकिन मुश्किल है उसके लिए भी …”
दो मिनट बाद गूगल हँसता हुआ आता है “भाई वो बोल रहा है बाबा, राजनेता और चूतिया उसकी स्टडी से बाहर के प्राणी है”
और हम हॅसने लगते हैं

लघु कथा ७


लघु कथा ७

“२५ अगस्त २०१६ में एक जैन दिगंबर मुनि आया था हरयाणा विधान सभा में भाषण देने ” पहले ने कहा

“और २५ अगस्त २०१७ को बाबा राम रहीम…. ” दूसरा बोला

फिर दोनों कहकहा लगाने लगे …

“अच्छा सुन पिताजी बाबा राम रहीम अब भक्तों के सपने में आ रहे हैं आजकल … सबसे कह रहे हैं भाजपा ने धोका दे दिया – वादा था अच्छे दिन का और भेज जेल दिया ” पहला बोला

दोनों फिर हॅसने लगे. तभी तीसरा बोला

“यह बात सुनी सुनी सी लगती है – और “धोखा धोखा……धोखा धोखा” गाने लगा “मौका मौका मौका मौका” की तर्ज पर

सपना ४५ :


सपना ४५ :


एक बहुत बड़ा मेला लगा है; सब हैं वहाँ; अमीर से अमीर लोग; कुछ तो इतने अमीर की अमीर लोगों को भी गरीब लगने लगे. मैं भी वहां हूँ – सार्वजानिक मेला है न – कोई भी जा सकता है शायद इसलिए मैं भी वहाँ हूँ …. तभी एक आवाज़ आती है “और यह है उर्जित पटेल जी का वो कंप्यूटर जिसपर उन्होंने नोटेबंदी के बाद बरामद नोटों की गिनती की थी …… बोली लगाइये मेहरबान, बोली लगाइये”
कोई बोली नहीं लगा रहा; मैं हिम्मत करके पहली बोली लगाता हूँ – “जनाब ५०,०००”
कोई बोली नहीं लगाता
“तो जनाब यह हुआ आपका …. ५० हज़ार एक ५० हज़ार दो ५० हज़ार ३ …. ले जाईये”
सुबह से बस यही सोच रहा हूँ किसी और ने उर्जित पटेल के कंप्यूटर पर बोली क्यों नहीं लगायी ? … फिर समझ आता है – सपने में तो मैं जीत ही सकता हूँ

सपना ४४ :


सपना ४४ :


उस दिन फ़ोन को चार्जर पर लगाकर सोने चला गया … सपना शुरू होते ही देखता हूँ जैसे जैसे फ़ोन चार्ज होता है वैसे वैसे फ़ोन पर बाल उगने शुरू हो जाते हैं … धीरे धीरे फ़ोन के बाल एक लम्बी दाढ़ी की शक्ल ले लेते हैं, चार्जर पर भी बाल उग रहे हैं और फ़ोन के साथ मिलकर यह दाढ़ी और भी लम्बी हो रही है…. फिर बड़ी तेज आवाज में फ़ोन चार्जर से बोलता है – यू आर माई लव चार्जर …. और चार्जर झूम झूम उठाता है
तभी पता नहीं क्यों बिजली चली जाती है और फ़ोन से निकलती आवाज़ धीमी होती चली जाती है … आखिर गर्मी बढ़ने से नींद खुल जाती है

लघु कथा ६ :


लघु कथा ६ :
“तुम्हे पता है एक शब्द होता है काकिस्तोक्रसी?” पहले ने कहा

“डेमोक्रेसी जैसा लगा है यह तो … क्यों इसमें क्या अलग होता है भाई ?” दूसरा बोला

“डेमोक्रेसी जैसा ही है भाई, लेकिन थोड़ा अलग – असल में जिस देश की सरकार सबसे बुरे, लगभग अनपढ़ और बेहद बेशर्म नेता चलाते हों उस देश की सरकार और सरकारी प्रणाली को काकिस्तोक्रसी कहते हैं.” पहले ने कहा

और दोनों हॅसने लगे; तीसरा मगर चुप रहा; “तो भाई एक बात बताओ इस सरकार के कामों का नतीजा क्या निकलता होगा?”

जैसे ही तीसरे ने पुछा, पहला और दूसरा चुप हो गए… तीसरा हॅसने लगा – विभस्त हंसी और बोलने लगा, “डेमोक्रेसी और काकिस्तोक्रसी की तरह और भी शब्द हैं जैसे खाकिस्तोक्रसी, इडिओक्रैसी, कोर्पोरटॉरसी, क्लेप्टोक्रेसी”

अब तीनो दोस्त झंडे की तरफ देखकर सलाम ठोकते हुए बोले – जय हिन्द – और हॅसने लगे

सपना ४३


सपना ४३ :


“साहब भूखे पेट ज्ञान चर्चा में मन नहीं लगता” …. सपने में विवेकानंद जी जैसा कोई आदमी बोल रहा है; लेकिन विवेकानंद “साहब!” शब्द का प्रयोग क्यों कर रहे हैं
“भाई विवेक मैंने तो १९६२ में ही मिड डे मील शुरू करवा दिया था तमिल नाडु में” के. कामराज ने जवाब दिया, “मुझे पता है भाई भूख क्या होती है, और भूखे पेट भजन नहीं होता भाई”
“१९८४ में गुजरात में भी चालू किया था मैंने” कोई गुजरती भाई बोला
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की इतने बड़े लोगों के बीच मैं क्या कर रहा हूँ की तभी मेरी बेटी ने पीछे से बोला, “पापा क्या यह सही है की सरकारी स्कूल में बच्चे सिर्फ दोपहर का खाना खाने जाते हैं?”
मेरे बोलने से पहले चारों तरफ से आवाजें आने लगीं, “भूख लगी है रोटी दो … भूख लगी है रोटी दो … भूख लगी है रोटी दो”

सपना ४२


सपना ४२
सामने ठाकरे साहब बैठे हैं; जज की कुर्सी पर; कोर्ट रूम भरा हुआ है. मैं वकील की ड्रेस में हूँ और कुछ जोर जोर से बोल रहा हूँ – लेकिन कोई सुन नहीं रहा …. जज साहब से एक अजीब सा आदमी कुछ बात कर रहा है – उसके आस पास काले बादल छाए हुए हैं … मैं बड़े ही ध्यान से उसको सुनने की कोशिश करता हूँ, “ठाकरे साहब सचमुच मुझे आपका यह फरमान नहीं मिला था – हमारे यहाँ का अखबार वाला आजकल डेंगू से बीमार है – इसलिए पता नहीं चला की आपने यह छपवा दिया है की इस बार मुंबई में कहीं पानी नहीं भरेगा” … यह आदमी आखिर है कौन … आस पास काले बादल हैं बीच बीच में बिजली कड़कती है तो वो अपने हाथ से उसका मुहँ बंद कर रहा है और खुद जज साहब के आगे खड़ा गिड़गिड़ा रहा है, “ठाकरे साहब प्लीज माफ़ कर दो; मुझे सच में नहीं पता चला … वर्ना मैं तो बरसता ही नहीं”
मैं जोर जोर से हॅसने लगता हूँ – और जैसे ही आँख खुलती है कहता हूँ “आमची मुंबई !!!!”