Poem XIV: चुनाव का मौसम आया (लम्बी कविता)


For First part of the poem please check

https://sachinmanan.wordpress.com/2014/03/20/poem-xii

पिछले दस सालों में इन्द्रसभा में कई नए कार्यालय खुले हैं

राजकोष रिक्त होने के कारन यही कार्यालय बने हैं

Image

व्यवस्था वैसे तब भी थी

जब यह कार्यालय नहीं थे

तब सीधा साधा काम था

“सैलाब”

आया करता था

अत्याचारियों, भ्रष्टचारियों  का विनाश कर

“लोह” जैसे धर्मी मानवों को

सुरक्षित कर जाया करता था

हो सकता है “लोह” ने कभी अपनी कार्यकुशलता की एवज में

इंद्रा से माँगा हो

“भगवन ! अब सैलाब वाला सिस्टम बंद कीजिए”

और इंद्र ने “ठीक है” कह दिया हो

धरती वासी विस्मित न हो

नेता और खुदा में  अंतर समझें

नेता को शर्म नहीं आती

और

ईश्वर के सन्दर्भ में यह बात विपरीत हो जाती है

Advertisements

Author: SachinManan

I think the only way i can express freely is through my writing ... i blog because this helps me reduce my stress...

कुछ कहना चाहोगे ?

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s