कविता

पहले एक घटना घटती है – बाह्रय जगत मे
फिर कुछ और घटता है – अन्त:करण में
क्रमशः घटना का दृश्य अनेकानेक आकार लेता है – मनःस्तिथि के अनुसार
अनुभूति जगती है और अंततः अभिव्यक्ति की व्याकुलता

बस यही प्रक्रिया है कविता कहने की… इस प्रक्रिया से प्रसफुटित कुछ कवितायें प्रस्तुत हैं

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नयी कवितायें

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कविता  क्रोध  विल वर्क फॉर फ़ूड  वो भी होगा यहाँ
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 स्वागत है २०१७   नशा  चाँद बेबाकी से  परिभाषा
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जय श्री राम